2017-06-24
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विमुद्रीकरण के बाद भारत में मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट के उपयोग में तेजी आई है, नए एफआईएस सर्वे में हुआ खुलासा

Fidelity National Information Services (5:00PM) 

Business Wire India
मुख्य तथ्य
एफआईएस ने उपभोक्‍ता बैंकिंग के अपने तीसरे विस्‍तृत वैश्विक शोध अध्‍ययन में सामने आए मुख्‍य तथ्‍य जारी किए।
सभी भारतीय उपभोक्‍ता श्रेणियों में मोबाइल और डिजिटल बैंकिेंग माध्‍यमों  के उपयोग में नाटकीय वृद्धि दर्ज की गई है।
डिजिटल बैंकिेंग और पेमेंट्स को बढ़ावा देने में युवा उपभोक्‍ता महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जो अपनी पूर्व पीढ़ी के मुकाबले बैंकिंग सेवा प्रदाताओं की सेवाओं से ज्‍यादा असंतुष्‍ट हैं।

वित्‍तीय सेवा प्रौद्योगिकी प्रदान करने वाली अग्रणी कंपनी एफआईएस (NYSE: FIS) द्वारा हाल में कराए गए एक सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि पिछले एक साल के दौरान भारतीय उपभोक्‍ताओं द्वारा मोबाइल डिवाइसेज और अन्‍य डिजिटल बैंकिंग चैनलों के उपयोग में काफी वृद्धि दर्ज की गई है, जो यह दिखाता है कि कैसे देश में हुए विमुद्रीकरण ने उपभोक्‍ताओं के बैंकिंग व्‍यवहार को बदल दिया है।
 
एफआईएस के तीसरे परफॉर्मेंस अगेन्‍स्‍ट कस्‍टमर एक्‍सपैक्‍टेशंस (पीएसीई) रिपोर्ट में भारत में 1000 बैंकिंग उपभोक्‍ताओं पर सर्वेक्षण किया गया और इसमें प्रतिभागिता करने वाले 60 फीसदी से ज्‍यादा लोगों ने बताया कि उन्‍होंने इस साल मोबाइल पर अपना अकाउंट बैलेंस चेक किया, हाल में किए गए ट्रांजेकशन देखे, बिल भरे, खाते से रकम हस्‍तांतरित की या अन्‍य बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाया। गौरतलब है कि 2016 में 39 फीसदी प्रतिभागियों ने और 2015 में 34 फीसदी प्रतिभागियों ने मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल बैंकिंग के इस्‍तेमाल की बात कही थी।
 
एफआईएस पीएसीई रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि भारत में बैंकों का प्रदर्शन अन्‍य देशों के बैंकों के मुकाबले खराब है विशेष तौर पर अपने ग्राहकों की उम्‍मीदों पर खरा उतरने के मामले में। 2017 पीएसीई स्‍टडी में भारतीय वित्‍तीय संस्‍थानों को 75 अंक मिले, जो 2016 में उन्‍हें मिले अंकों से 1 अंक ज्‍यादा है लेकिन वैश्विक औसत पीएसीई स्‍कोर के मुकाबले 7 अंक कम है।
 
भारतीय उपभोक्‍ताओं के बारे में सामने आई मुख्‍य बातें
करीब 18 फीसदी प्रतिभागी अब भी अपने प्राइमरी बैंक के क्रेडिट कार्ड का ज्‍यादा इस्‍तेमाल करते हैं।
प्राइमरी बैंक द्वारा डिजिटल भुगतान विकल्‍प उपलब्‍ध कराए जाने का महत्‍व प्रत्‍येक आयु वर्ग में साल दर साल बढ़ रहा है।
प्रतिभागियों ने बताया कि उनके 30 फीसदी से ज्‍यादा भुगतान कार्य नकद, चेक या क्रेडिट/डेबिट कार्ड के मुकाबले मोबाइल ऐप्‍स से किए जाते हैं।

भारत में जेनरेशन वाई (18 से 36 वर्ष आयु वर्ग) ने क्‍या कहा
उपभोक्‍ता अपनी सुविधा के अनुसार कहीं भी, कभी भी बैंकों से जानकारी और सेवाएं चाहते हैं।
जेनरेशन वाई के लिए सबसे बड़ी समस्‍या समय निकालकर बैंकों की शाखाओं में जाना है।
 पुरानी पीढ़ी के बजाय जेनरेशन वाई अपने बैंकों की सेवाओं से कम संतुष्‍ट हैं।

एफआईएस के प्रबंध निदेशक (भारत और दक्षिणएशिया) रामस्‍वामी वेंकटचालम ने बताया, ‘’ पहले से कहीं ज्‍यादा अब भारतीय उपभोक्‍ता अपने बैंकों से अपनी सुविधानुसार जुड़ना चाहते हैं, कहीं भी और कभी भी।‘’ उन्‍होंने कहा, ‘’ जैसे- जैसे भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था नकद और प्‍लास्टिक से नकदरहित, मोबाइल व डिजिटल की ओर बढ़ रही है और बैंकों को अब अपने ग्राहकों के साथ विभिन्‍न सेवाओं के जरिए मजबूत संबंध बनाने की जरूरत है। पीएसीई के नतीजों से यह तस्‍वीर साफ हो गई है कि भारतीय बैंकों को कौन सी बातों पर ध्‍यान देने की जरूरत है, जिससे उनके ग्राहक उनकी प्राथमिकता बने रहें।‘’
 
कुल मिलाकर 2017 एफआईएस पीएसीई अध्‍ययन में भारत, ऑस्‍ट्रेलिया, ब्राजील,कनाडा, जर्मनी, थाइलैंड, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका जैसे 8 देशों 8000 से ज्‍यादा बैंकिंग उपभोक्‍ताओं पर सर्वेक्षण किया। एफआईएस द्वारा किए गए सर्वेक्षण में अन्‍य क्षेत्रों के देशों के मुकाबले भारतीय प्रतिभागियों ने कहीं भी और कभी भी अपने खातों तक पहुंचने और बैंकों द्वारा उपलब्‍ध कराए गएडिजिटल भुगतान विकल्‍पों को पहले से ज्‍यादा महत्‍व दे रहे हैं। अब वे व्‍यक्तिगत तौर पर बैंकों की शाखाओं में नहीं जाना चाहते हैं और चाहते हैं कि बैंक उनकी वित्‍तीय जरूरतों को समझे।
 
वैश्विक पीएसीई सर्वेक्षण के नतीजे

2017 एफआईएस ग्‍लोबल पीएसीई अध्‍ययन में खुलासा हुआ है कि जहां वैश्विक बैंक उपभोक्‍ताओं को व्‍यक्तिगत एवं विभिन्‍न माध्‍यमों के जरिए सेवाएं उपलब्‍ध कराने की उम्‍मीदों पर खरे उतर रहे हैं लेकिन अब वे उपभोक्‍ताओं के साथ मजबूत रिश्‍ते बनाने और उनका भरोसा जीतने जैसे – अपने वादों को पूरा करना, छिपे हुए शुल्‍क एवं फीस मुक्‍त उत्‍पाद एवं सेवाएं उपलब्‍ध कराना, उनकी जरूरतों के अनुसार योजनाएं पेश करना और विश्‍वसनीय वित्‍तीय सलाह देने के साथ ही ग्राहकों को उनके वित्‍तीय लक्ष्‍य हासिल करने में मदद करने के मामले में काफी काम करने की जरूरत है।
 
2017 वैश्विक अध्‍ययन की अन्‍य मुख्‍य बातें –

दुनिया भर में बैंकिंग उपभोक्‍ता सुरक्षा, कुशलता, निष्‍पक्षता और कहीं भी कभी भी अपने खातों तक पहुंच को प्राथमिकता देते हैं। पिछले तीन साल से कराए जा रहे इस एफआईएस अध्‍ययन में ये चारों बातें और उनकी रैंकिंग अब भी शीर्ष पर हैं।
प्रतिभागियों के लिए डिजिटल भुगतान अब बैंकिंग सुविधाओं में 8वां  सबसे महत्‍वपूर्ण फीचर हो गया है, जो 2015 व 2016 में 12वें स्‍थान पर था।
उपभोक्‍ताओं के लिए सरलता बेहद महत्‍वपूर्ण हो गई है और अब यह छठा सबसे महत्‍वपूर्ण फीचर है जबकि 2015 में यह 8वें स्‍थान पर थी।
मोबाइल भुगतान- शॉपिंग से लेकर लोगों को पैसे हस्‍तांतरित करने में 2016 से 2017 के दौरान इसके इस्‍तेमाल में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई।
इस बात की आशंका अधिक है कि युवा उपभोक्‍ताओं को अपने वित्‍तीय संस्‍थानों से ज्‍यादा शिकायतें होंगी। हालांकि पुरानी पीढ़ी के मुकाबले युवा लोग अपने बैंकों के साथ ज्‍यादा संपर्क करते हैं।

भारत और वैश्विक स्‍तर के साथ ही अन्‍य देशों पर केंद्रित पीएसीई रिपोर्ट की पूरी प्रति को निम्‍नलिखित लिंक्‍स के जरिए डाउनलोड किया जा सकता है।


http://closethegaps.fisglobal.com और http://closethegaps.fisglobal.com/country-insights/.

एफआईएस के बारे में

एफआईएस, वित्‍तीय सेवा टेक्‍नोलॉजी क्षेत्र में अग्रणी कंपनी है और इसका पूरा ध्‍यान रिटेल एवं संस्‍थागतबैंकिंग, भुगतान, आस्तियों एवं संपत्ति प्रबंधन, जोखिम एवं अनुपालन, सलाहकार और आउटसोर्सिंग सॉल्‍यूशंस पर केंद्रित है। अपने सॉल्‍यूशंस पोर्टफोलियो में मौजूद सेवाओं, वैश्विक योग्‍यताओं एवं क्षेत्र केंद्रित विशेषज्ञताओं के जरिए एफआईएस 130 देशों में 20,000 से अधिक ग्राहकों को सेवाएं उपलब्‍ध कराती है। जैक्‍सनविले, फ्ले में मुख्‍यालय वाली एफआईएस में दुनियाभर में 57,000 से ज्‍यादा लोग कार्यरत हैं और यह पेमेंट प्रोसेसिंग, वित्‍तीय सॉफ्टवेयर और बैंकिंग सॉल्‍यूशंस में अग्रणी है। वित्‍तीय दुनिया को सशक्‍त बनाने वाली सॉफ्टवेयर, सर्विसेज और आउटसोर्सिंग टेक्‍नोलॉजी उपलब्‍ध कराने वाली एफआईएस फॉर्च्‍युन 500 कंपनियों में शामिल है और यह स्‍टैंडर्ड एंड पुअर्स 500 इंडेक्‍स में भी शामिल है। एफआईएस के बारे में अधिक जानकारी के लिए देखें www.fisglobal.com.

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स्रोत का संस्‍करण बिजनेसवायॅर डॉट कॉम पर देखें:
http://www.businesswire.com/news/home/20170621006365/en/
 
संपर्क:
किम स्‍नाइडर, 904.438.6278
वरिष्‍ठ उपाध्‍यक्ष
एफआईएस ग्‍लोबल मार्केटिंग एंड कम्‍युनिकेशंस
kim.snider@fisglobal.com

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