09-03-2017
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उन्नत आर्ट तकनीक एमएसीएस गर्भधारण की बढ़ी दरों के साथ सफल साबित

 (08:19 Hrs. IST) 

मुंबई, March 9, 2017 /PRNewswire/ --

भारत के फर्टिलिटी सेंटर्स की श्रृंखला में अग्रणी, नोवा आईवीआई फर्टिलिटी ने घोषणा की है कि पुरूष इंफर्टिलिटी के उपचार हेतु एडवांस्ड आर्ट (एसिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी) तकनीक - मैग्नेटिक एक्टिवेटेड सेल सॉर्टिंग (एमएसीएस) के जरिए मुंबई में पहले शिशु के जन्म के बारे में बताया। श्रीमती गीता (परिवर्तित नाम) की उम्र 39 वर्ष है। आईयूआई और आईवीएफ के कई चक्रों के बाद भी, वो 8 वर्षों से गर्भधारण नहीं कर पा रही थीं। विभिन्न उपचारों को आजमाये जाने के बावजूद, अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। पता चलने के बाद, नोवा आईवीआई फर्टिलिटी के फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स को पता चला कि उनके पति विनय (परिवर्तित नाम) के शुक्राणुओं की संख्या व गुणवत्ता निम्न है, जो कि गर्भधारण के लिए एक समस्या थी।

आईवीआई फर्टिलिटी, मुंबई के फर्टिलिटी कंसल्टेंट, डॉ. रिचा जगताप ने मि. विनय में उच्च डीएनए फ्रैगमेंटेशन इंडेक्स पर आधारित पुरूष इंफर्टिलिटी की शिकायत पाई और उन्होंने एमएससीए को अपनाने का परामर्श दिया, जो कि उस समय सापेक्षिक रूप से नई तकनीक थी। वो इस मामले के बारे में बताती हैं, ''उनकी उम्र और अनेक विफलताओं के चलते उनके घटते अंडाणुओं को देखते हुए, गीता को आईवीएफ/आईसीएसआई की सलाह दी गई। आईवीएफ का पहला चक्र भी विफल रहा और दूसरे प्रयास के पहले, हमने विनय के लिए डीएनए फ्रैगेमेंटेशन इंडेक्स (डीएफआई) टेस्ट का परामर्श दिया। डीएफआई 34 प्रतिशत थी जो कि शुक्राणुओं की खराब गुणवत्ता को दर्शा रही थी, और इसलिए बेहतर शुक्राणुओं के पृथक्करण हेतु एमएसीएस प्रक्रिया का परामर्श दिया गया। उपचार का सकारात्मक परिणाम मिला और अंततः, इस कपल का गर्भधारण चक्र सफल रहा और अब वे एक स्वस्थ शिशु के खुशहाल मां-बाप हैं।''

पिछले कुछ वर्षों में, मुंबईवासियों में पुरूष इंफर्टिलिटी की समस्या में तीव्र वृद्धि देखने को मिली है। बांझपन से जुड़े सभी मामलों में लगभग 40-45 प्रतिशत मामलों में पुरूष जिम्मेवार होते हैं और नोवा आईवीआई फर्टिलिटी में जांच किये गये मरीजों में, पुरूष इंफर्टिलिटी में पहले के 45 प्रतिशत की तुलना में लगभग 66 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पुरूषों की इंफर्टिलिटी को प्रभावित करने वाले कई कारक हैं। यह वंशानुगत हो सकता है या संक्रमण, टेस्टिक्यूलर या पेल्विक इंज्युरी या गंभीर चिकित्सा स्थिति के परिणामस्वरूप हो सकता है। लगभग 5-10 प्रतिशत पुरूष इंफर्टिलिटी 'अजूस्पर्मिया' के चलते होता है, अर्थात वीर्य में वर्धनक्षम शुक्राणुओं का अभाव। कभी-कभी पुरूष पर्याप्त मात्रा में शुक्राणु निकालने में सक्षम होते हैं, लेकिन उसकी गुणवत्ता अच्छी नहीं होती। उम्र, देर से विवाह, पोषण, नियमित व्यायाम न करना, कार्य दबाव, पर्यावरणीय प्रदूषकों का संस्पर्श आदि जैसे जीवनशैली कारक भी पुरूषों में इंफर्टिलिटी के प्रमुख कारण होते हैं। धूम्रपान, नशीले पदार्थों एवं शराब के सेवन जैसी आदतें पुरूषों की प्रजनन शक्ति को नकारात्मक तरीके से प्रभावित करती हैं।

पुरूष इंफर्टिलिटी जांच कैसे किया जाता है

सामान्यतया, पुरूष इंफर्टिलिटी जांच व्यापक मेडिकल हिस्ट्री और वीर्य विश्लेषण के साथ शुरू होती है, जिसमें स्खलित वीर्य में शुक्राणु की संख्या, गतिशीलता और आकारिकी का परीक्षण किया जाता है। आगे की जांच, विश्लेषण के परिणामों पर आधारित होती है। उदाहरण के लिए, कम शुक्राणु संख्या वाले पुरूषों को हॉर्मोनल या जेनेटिक टेस्टिंग करानी पड़ सकती है। यदि स्खलित वीर्य में शुक्राणु नहीं मिलता है, तो टेस्टिक्यूलर बायोप्सी कराना पड़ सकता है।

बांझपन की समस्या से जूझ रहे जोड़ों को चाहिए कि वे दोनों साथियों के लिए उचित सहायता प्राप्त करने हेतु हरसंभव प्रयास करें। गायनकोलॉजिस्ट/एंड्रोलॉजिस्ट द्वारा बांझपन की पुष्टि कर दिये जाने के बाद, पुरूषों को चाहिए कि वे व्यापक बांझपन देखभाल इकाइयों में देखभाल की मांग करें। उपचार के कई विकल्प हैं, जैसे-साधारण गोली से लेकर आईयूआई (सीधे गर्भाशय में शुक्राणुओं का प्रवेश कराना) और आईवीएफ-आईसीएसआई (टेस्ट ट्युब बेबी)। ये सभी उपचार कारण एवं स्थिति की गंभीरता के अनुसार प्रयोग में लाये जाते हैं। एमएसीएस जैसी उन्नत एआरटी तकनीकें आईसीएसआई के लिए बेहतर गुणवत्ता के शुक्राणुओं का चयन करने में मदद करती हैं।

मैग्नेटिक एक्टिवेटेड सेल सॉर्टिंग (एमएसीएस) वीर्य तैयार करने की तकनीक है, जिसमें कम-प्रजनन संभावना वाले एपॉप्टोटिक स्पर्मेटोजोवा से नॉन--एपोप्टोटिक स्पर्मेटोजोआ का चुंबकीय पृथक्करण शामिल होता है। एपोप्टोसिस (प्रोग्रामयुक्त कोशिका मृत्यु) कोशिका चक्र की विनियमन प्रक्रिया है जो स्पर्मेटोजेनेसिस (स्पर्म कोशिकाओं या स्पर्मेटोजोआ के विकास की प्रक्रिया) के दौरान होती है और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है जैसे-डीएनए स्पर्म विखण्डन। एमएसीएस की मदद से मरणासन्न शुक्राणुओं को बेहतर शुक्राणुओं से अलग किया जा सकता है। इससे बेहतर प्रजनन दर, अर्ली इंब्रायो क्लीवेज, इंप्लांटेशन दर व गर्भधारण दर0 हासिल करने में मदद मिलती है।

डॉ. जगताप आगे बताते हैं, ''उच्च डीएनए विखण्डन, पिछले आईवीएफ-आईसीएसआई चक्र में खराब प्रजनन दर एमएसीएस, बार-बार गर्भपात व अन्य की स्थिति में, एमएसीएस का परामर्श दिया जाता है। इजैक्युलेट में अपोप्टोटिक स्पर्मेटोजोआ के उच्च स्तर के लिए धूम्रपान, बुखार, वैरिकोसील, तनाव आदि जैसे कारकों को जिम्मेवार माना जाता है। एमएसीएस उन मरीजों को भी परामर्श दिया जाता है, जिनका आईवीएफ का दो चक्र से अधिक विफल हो चुका है और जिनमें बहुत खराब प्रजनन शक्ति होती है और जिनमें डीएफआई बहुत अधिक हो। हमने अपने सेंटर में 40 से अधिक मामलों में एमएसीएस का इस्तेमाल कियि है और इन मामलों में प्रति भ्रूण स्थानांतरण लगभग 66 प्रतिशत की गर्भधारण हासिल हुई है। हमने पाया है कि लोग अब इस तकनीक के बारे में बेहतर जानने लगे हैं और पिछले 10 महीनों में एमएसीएस को स्वीकारने की प्रवृत्ति बढ़ी है।''

एमएसीएस को पुरूष इंफर्टिलिटी के उपचार का प्रभावी तरीका माना जाता है और यह अनेक कपल्स व फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स के लिए भारी राहत के रूप में उभरा है। भारत में बढ़ते बांझपन के मामलों केक मददेनजर, एमएसीएस जैसी उन्नत आर्ट तकनीकें देश के अनेक निस्संतान दंपत्तियों के लिए वरदान हैं।

नोवा आईवीआई फर्टिलिटी के बारे में 

नोवा आईवीआई फर्टिलिटी (एनआईएफ) प्रजनन क्षेत्र से जुड़े सबसे बड़े सेवा प्रदाताओं में से एक है। एनआईएफ का उद्देश्य आईवीआई स्पेन के सहयोग से भारत में उन्नत सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) को पेश करना है। बेहतरीन सॉफ्टवेयर, प्रशिक्षण और गुणवत्ता प्रबंधन के साथ इस साझेदारी से नोवा की आईवीएफ सेवाओं और तकनीक काफी बेहतर हुई हैं। आईवीआई के अंतरराष्ट्रीय अनुभव के साथ एनआईएफ द्वारा भारत में उसी प्रक्रिया, प्रोटोकॉल और पॉलिसी की पेशकश की जा रही है।

आईयूआई, आईवीएफ और एंड्रोलॉजी जैसी मूलभूत सेवाओं के अलावा एनआईएफ द्वारा भ्रुण और अंडो के संरक्षण के लिए विट्रिफिकेशन, ट्रांसफर हेतु सबसे अच्छे भ्रुण के चयन के लिए एंब्रोस्कोप व भ्रुण स्वीकार करने की गर्भाशय की क्षमता का पता लगाने हेतु एरा जैसी कई अत्याधुनिक सेवाओं की पेशकश भी की जा रही है जिसके बाद आई वी एफ-आईसीएसआई करवाने से कई बार असफलता से गुजरने वाले मरीजों की गर्भावस्था की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। एनआईएफ द्वारा फिलहाल भारत में 17 फर्टिलिटी सेंटर्स का संचालन किया जा रहा है (अहमदाबाद, बेंगलुरू (3), चेन्नई, कोयम्बतूर, नई दिल्ली (2), हिसार, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, कोलकाता, मुंबई (2), पुणे और सूरत)।

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