फीचर


  • इलेक्ट्रोलाइट पंप से एक मिनट में चार्ज हो सकते हैं इलेट्रिक वाहन(08:16)
    विवेक त्रिपाठी
    अल्मोड़ा (उत्तराखंड), 20 जुलाई (आईएएनएस)| "कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों!" दुष्यंत कुमार के इस शेर को चरितार्थ कर दिखाया है उत्तराखंड अल्मोड़ा के काफलीखान क्षेत्र में रहने वाले रवि टम्टा ने। उन्होंने अपने हुनर से पर्यावरण को संरक्षित करने की जरूरत को देखते हुए एक ऐसा यंत्र तैयार किया है, जिससे कुछ ही मिनटों में इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज किया जा सकता है और इसमें लागत भी न के बराबर आएगी।
  • उत्तराखंड का धनोल्टी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र(18:37)
    मुस्कान अग्रवाल
    धनोल्टी (उत्तराखंड), 14 जुलाई (आईएएनएस)| 'देवभूमि' उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में जब कोई एक सुरम्य स्थल धनोल्टी पहुंचता है, तो वह वहां देवदार के पेड़ों के माध्यम से ताजी हवा महसूस करता है। इस हवा में मिट्टी, लकड़ी की सुगंध और आस-पास के वातावरण की महक मिली होती है।
  • उप्र : बांदा में डीएम आवास के कुओं को जीर्णोद्धार का इंतजार(18:26)
    आर. जयन
    बांदा, 14 जुलाई (आईएएनएस)| 'नाउन सबके पैर धोवे, आपन धोवत लजाय' वाली बुंदेलखंड की चर्चित कहावत उत्तर प्रदेश में बांदा के जिलाधिकारी के सरकारी आवास परिसर में चरितार्थ हो रही है। इस परिसर के जीर्ण-शीर्ण कुओं को जीर्णोद्धार का इंतजार है। खास बात यह कि इन्हीं कुओं की तस्वीरों का इस्तेमाल कर 'कुआं-तालाब जियाओ' अभियान शुरू किया गया है।
  • उप्र : बाजारों ने सावन के परिधानों की बदली रंगत(08:37)
    लखनऊ , 12 जुलाई (आईएएनएस)| सावन का माह आते ही भगवान शिव की ओर ध्यान अपने आप आकर्षित होने लगता है। परिधान की भी रंगत बदलने लगती है। इस बार सावन ने बाजारों में परिधानों को नए ट्रेंड में बदल दिया है और रंग से ज्यादा सिंबल प्रिंट ज्यादा चलन में है।
  • वर्षाजल से कुओं को कर रहे जिंदा(11:53)
    विवेक त्रिपाठी
    लखनऊ, 7 जुलाई (आईएएनएस)| उत्तर प्रदेश की राजधानी में भूजल की स्थित चिंताजनक हो चली है। जलदोहन के कारण प्राकृतिक भूजल भंडारों को भारी क्षति पहुंची है। सुकून की बात यह है कि यहां के रिद्धि किशोर गौड़ जलसंचय के माध्यम से कुओं और जलस्रोतों को जिंदा करने में लगे हैं।
  • बिहार : ग्रामीण कर रहे वर्षाजल संचय(09:41)
    मनोज पाठक
    मधुबनी (बिहार), 7 जुलाई (आईएएनएस)| बिहार के सुपौल और मधुबनी जिले के कई गांवों के ग्रामीणों ने जलसंकट से निपटने के लिए जलसंचय को मूलमंत्र मानते हुए जल जमा करने का अनोखा तरीका अपनाया है। ये ग्रामीण बारिश के दौरान किसी खाली स्थान पर प्लास्टिक शीट टांग देते हैं और उस पर गिरने वाले पानी को टंकी में जमा करते हैं। बाद में गांव के लोग उस पानी का इस्तेमाल करते हैं।
  • छत्तीसगढ़ में जैविक खाद से 15 लाख सालाना कमाने वाला बना 'मास्टर ट्रेनर'(19:03)
    संदीप पौराणिक
    बिलासपुर, 4 जुलाई (आईएएनएस)| कहावत है, जहां चाह वहां राह। इसे साबित कर दिखाया है, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के किसान प्रमोद शर्मा ने। वह कचरे और गोबर से जैविक खाद बनाकर खेती से हर साल 15 लाख रुपये तक कमाने लगे हैं। प्रमोद के इस सफल प्रयास को राज्य सरकार किसानों तक ले जाने की तैयारी में है। उन्हें 'मास्टर ट्रेनर' भी बनाया गया है।
  • बुंदेलखंड में तालाब पुनर्जीवित हुए तो खिल उठेगा इलाका(18:41)
    संदीप पौराणिक
    भोपाल, 27 जून (आईएएनएस)| बुंदेलखंड कभी जल संरचनाओं के कारण पहचाना जाता था, मगर अब यही जल संरचनाओं के गुम होने से इस इलाके की पहचान समस्याग्रस्त इलाके की बन गई है। अब सैकड़ों साल पुराने तालाबों को पुनर्जीवित करने की योजना बन रही है, अगर यह ईमानदार पहल हुई तो यह इलाका खिल उठेगा, क्योंकि पानी की समस्या ने ही इस क्षेत्र को दुनिया के बदहाल इलाके की पहचान जो दिलाई है।
  • बिहार में एईएस छीन रहा बच्चों का बचपन!(18:31)
    मनोज पाठक
    मुजफ्फरपुर, 26 जून (आईएएनएस)| बिहार के मुजफ्फरपुर सहित करीब 20 जिलों में फैले एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के कारण अभिभावक जहां अपने बच्चों को खोने को लेकर भयभीत हैं, वहीं इस बीमारी से पीड़ित बच्चे अपना बचपन खो रहे हैं। इस बीमारी से बचकर अस्पताल से घर लौटे बच्चों की स्थिति ठीक नहीं है। पहले से ही गरीबी और कुपोषण के शिकार इन बच्चों को एईएस ने पूरी तरह तोड़ दिया है।
  • भिखारियों को रोजगार नहीं, भिक्षाटन ही पसंद(08:53)
    विवेक त्रिपाठी
    लखनऊ, 26 जून (आईएएनएस)| उत्तर प्रदेश की राजधानी में नगर निगम अब भीख मांगने वाले लोगों को रोजगार से जोड़ने की मुहिम चलाने जा रही है, ताकि उनकी आय सुनिश्चित हो सके और जीवन स्तर सुधरे। मगर भिखारी काम में लगने को तैयार नहीं हैं, उन्हें अपना मौजूदा हाल ही पसंद है।